एक हमारे सत्तू भैया रहे। सत्तू भैया नहीं समझते ? सतवीर सिंह चंदेल, उनका पूरा नाम रहा। नोटबंदी के भरपूर समर्थक। सोते हुए भी कोई नोटबंदी की बात छेड़ दे तो वो तुरंत समर्थन करने लगते थे। ठीक मोदी जी की भांति उनका भी मानना यही था कि नोटबंदी से पूरा कालाधन तो नहीं पर हाँ कुछ बहुत कालाधन तो वापस आ ही जाएगा। नोटबंदी के विरोध में कोई मिल जाता तो उससे तुरंत ऐंठ जाते और नोटबंदी के दस ठो फायदे ऊपर से गिना देते। तब तक नोटबंदी के फायदे गिनाते जब तक सामने वाला उनकी बात को अपने गले से न लगा लेता। वे सिर्फ बकैत ही नहीं थे, बल्कि उनके काम भी वैसे ही थे। अभी उनके फूफा जी, जो कभी उनके घर नहीं आते थे। शायद अमावस की सौ राते बीतने के बाद, एक अमॉस की रात अँधेरे में उनके घर पर अपनी सफारी से दस्तक दे बैठे और उनके अकाउंट में ढाई लाख रुपया जमा करने का ऑफर भी दे दिए। जैसे कि आप सभी को पता है सत्तू भैया सिर्फ बोलते ही नहीं थे, वह अमल भी करते थे। उन्होंने तुरंत अपने फूफा जी को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और इस कार्य में उनकी कोई मदद करने से साफ़ इनकार कर दिया। इसका परिणाम सत्तू भैया को पता था कि फूफा नाराज़ हो जायेंगे और बुरी से बुरी परिस्थिति में शायद कभी मदद न करे। पर उन्होंने देश हित को प्रथम स्थान पर रखा। और उनके फूफा जितना मुस्कुराते हुए आये थे, उतना ही मुहँ लटकाये वापस लौट गए।

अभी अपने सत्तू भैया सिगरेट की दूकान में सुट्टा फूंक रहे थे। वैसे तो वो 11 रुपये वाली गोल्ड फ्लैक पीते थे, पर आजकल नोट बंदी के कारण वे 10 रुपये वाली ही पीते है। ताकि छुट्टा अधिक खर्च न हो। हफ्ते में एक दिन एटीएम में लाइन में लगते है ताकि हफ्ते भर के लिए उन्हें खर्च पानी का कुछ पैसा मिल जाए। खैर, वह सिगरेट की पहली कस लिए ही थे कि तभी उनके एक जान परिचित के असफाक साहब कार से उतरे। सुट्टा लेते समय उनके जेब में शायद दो हज़ार का नोट रहा। देने लगे गुमटी वाले को। गुमटी वाले के पास कहाँ दो हज़ार का छुट्टा मिलेगा? उसने इनकार कर दिया। भाई वो शुरू हो गए मोदी जी को गरियाने। मोदी जी की ऐसी की तैसी कर ही रहे थे कि कुछ देर तो सत्तू भाई चुप रहे फिर जब उनसे न सुना गया तो अपने जेब से 11 रुपये निकाले और गोल्ड फ्लैक के पैसा गुमटी वाले को पकड़ा दिए। साथ ही साथ अपने मित्र का आँखों ही आँखों में इशारा कर दिए कि अगर अब मोदी जी के बारे में कुछ बोले तो उनसे बुरा कोई न होगा।


दोनों लोग गुमटी से थोड़ा अलग हुए और सुट्टा फूंकने लगे। दोनों साथ खड़े थे पर बात कुछ न कर रहे थे। दोनों लोगो को यह ठीक तरह से पता था कि नोटबंदी के मामले में एक के मन में विचारो की गंगा बहती है और दूसरे के मन में जमुना। या यूँ कहे एक शुद्ध शाकाहारी है और दूसरा शुद्ध मांसाहारी। कुछ देर खामोश रहने के बाद असफाक भाई से न रहा गया और धीरे से बोल उठे ‘सत्तू, तुम्हे नहीं लगता है? मोदी जी ने नोटबंदी करके गलत किया है? ‘
सत्तू भाई का गुस्सा उफान में आगया, उन्हें ऐसा लगा, जैसे उनके ही पैसे की सिगरेट खरीदकर उनके ही हाथ में चुभा दी हो। वह तुरंत उत्तेजित होकर पूछ बैठे ‘ का गलत किया है? बताओ आपका दिक्कत का है? मुफ्त सिगरेट पिए का मिल गयी नोटबंदी के कारण और कितना अच्छे दिन चाहिए आपका? ‘

उन्होंने सत्तू भाई के गुस्से को समझ और धीरे से बोले ‘ देखो सत्तू, मैं जानता हूँ कि तुम नोटबंदी के समर्थक हो। पर बताओ, कालाधन तो अडानी, अम्बानी, माल्या जैसे लोगो के पास है। काहे हम लोगो को परेशान किये हुए है मोदी जी? ‘
बात भी सही थी, हर किसी को लगता है कि उसके पास मेहनत से कमाया हुआ धन है और उनसे अधिक अमीर लोग सिर्फ और सिर्फ कालाधन के बल में ही चलते है। एक बार रविश कुमार को भी एक प्रश्न का जवाब न मिला तो उन्होंने भी इस मुद्दे को उठाया। बोले ‘ मेरे पास मेहनत की कमाई है, जो हेलीकाप्टर से चलते है, कालधन उनके पास है। ‘

सत्तू भैया थोड़ा शांत हुए फिर बोले ‘ असफाक साहब, दो दो हज़ार के लाइन में तो हम लगे है। आप तो अपने नौकरो को भेज देते हुए रुपये बदलवाने। आपको क्या दिक्कत हो रही है? एक बात बताओ, आप देश बदलने की बात करते हो। हर चीज़ सरकार से उम्मीद करते हो, कुछ दिन देश के लिए खुद को नहीं बदल सकते? ‘ सत्तू भाई तुरंत अपने फोन निकाले और फोटो दिखाते हुए बोले ‘ देखो पहले की फोटो और अब की फोटो। लाइन में लग लग के काले हुए जा रहे है ? शादी की उम्र है फिर भी कौनो से कोई शिकायत नहीं किये। पता नहीं, अब कौनो पसंद भी करेगा या नहीं? हर काम मोदी जी थोड़ा कर देंगे, थोड़ा तुम भी कष्ट देखो। ‘

असफाक साहब शाकपकिया गए। फिर संभलते हुए जवाब दिया ‘ ये तो हमारी मेहनत की कमाई है।तुम तो जानते हो सत्तू। कितना मेहनत करते है, हम लोग। सरकार को उन लोगो के पास सेंध मारनी चाहिए, जिनके पास अरबो में कालाधन है। स्विस बैंक में पैसा जमा है। वह वापस लाना चाहिए ‘

सत्तू भैया को बात समझ आयी, कुछ देर चुप रहे फिर उन्होंने सिगरेट की एक लंबी कस मारके फेंकते हुए बोले ‘ मैं मोदी जी के इस कदम को पहले कदम के रूप में स्वागत करता हूँ। उनका अगला कदम, प्रॉपर्टी और स्विस बैंक में होना चाहिए। अगर यह उनका अंतिम कदम है तो मैं इसका विरोध करूँगा। ‘ फिर आगे जोड़ते हुए बोले ‘ अभी तक तो परमाणु बम के लिए बोल रहे थे, परमाणु हमला हो जाए पकिस्तान से, ज्यादा से ज्यादा मर ही तो जाएंगे। अब पैसा निकाले में ऐसी की तैसी हुई जा रही है तुम्हरी। अपनी करनी और कथनी में अंतर न रखो असफाक साहब। ‘

सत्तू भाई बोल ही रहे थे कि तभी असफाक भाई साब के पास फोन आया और वे हटकर बात करने लगे। ‘ सुनो, कोई आदमी हो बैंक में, उससे बात करो। मैं 20% देने को तैयार हूँ, मेरे पैसे बदलवा दे। ‘
फिर थोड़ी दूर जाकर वे धीरे से बोले ‘ 25 ‘

सत्तू भाई को तुरंत समझ में आगया कि 25 लाख रुपये बदलवाने की बात कर रहे है। अब वहां उन्हें रुकना मुनासिब न समझ। धीरे से सत्तू भाई वहां से खिसक लिए।

अगले दिन उन्हें उनके एक मित्र मिले जो बैंक में काम करते थे। फिर बात करते करते नोटबंदी पर पहुच गयी। आखिर आजकल किसी भी बात का अंत नोटबंदी पर ही ख़तम होता है। आजकल यह उतना ही बड़ा सत्य है जितना बड़ा मृत्यु। आप ज़िन्दगी में चाहे जो काम कर लो अंत में मरना ही है। ठीक उसी तरह मोहब्बत हो या फिर ऑफिस की बाते अंत नोटबंदी की बात पर ही ख़तम होती है। कुछ लोग मोदी को गरियायेंगे और कुछ लोग समर्थन करेंगे। इस नोट बंदी की यह खासियत ही है कि लोग मिलते एक साथ है और उठते समय दो गुटो में विभाजित हो जाते है। ठीक उसी तरह, सत्तू भाई भी पूछ बैठे ‘ सुना है, बैंक से पैसे दो नंबर तरीके से भी बदल जाते है। ‘

उनका मित्र बड़ी क्रोधित होकर जवाब दिया ‘ मोदी जी का ये बड़ा गलत फैसला है। उन्होंने ढंग से अमल ही नहीं किया। पूरी दुनिया लाइन में लगी है और हमें भी काउंटर पे सारा दिन बैठना पड़ता है। इससे कोई परिणाम न निकलेगा। हर कोई नोट बदलने का काम कर रहा है बैंक में। सारा कालाधन १०% में सफ़ेद हुआ जा रहा है। इसे बैंक वाले कर्मचारी अपनी ऊपरी कमाई समझ रहे है। कुछ न होगा इस फैसले का। दुनिया का सबसे घटिया फैसला है ये। मैं अकेले क्या कर सकता हूँ? ‘

सत्तू भाई उसकी बात बड़े ध्यान से सुन रहे थे। बात भी सही थी, हर कोई यही कार्य कर रहा है तो अकेला व्यक्ति क्या कर सकता है। वे सोच ही रहे थे कि उनके मित्र ने चुपके से कान के पास आकर कह ही दिया ‘ अगर कोई हो तो बताना, 10% में पैसा बदल दूंगा। ‘

सत्तू भाई भी इस बार उनकी बात सुनकर खींसे निपोर दिए और मुस्कुराते हुए सर हिलाकर बोले। ‘ जरूर। ‘ पर मन में सोच रहे थे। मोदी जी तुम्हारी पूरी जनता ही चोर है। आप किसके लिए कालाधन निकलवा रहे थे ? जो खुद कालाबनाने की फिराक में है। सिर्फ मौका नहीं मिला, नहीं तो वे भी अम्बानी, अडानी से कम कालाधन न रखते। परंतु गाली आपको ही खानी है। ठीक वैसे ही जैसे उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।

धीरे से जेब से फोन निकाला और असफाक भाई को मिला दिया ‘ असफाक भाई, चोरो की बस्ती में कोतवाल क्या करेगा ? मोदी जी ने सच में दुनिया का सबसे घटिया फैसला लिया है। बताओ कितना पैसा बदलवाना है?