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मेरा जन्म श्री कृष्ण के छठी के दिन क्या हुआ, घर वालो ने मुझे कन्हैया का अवतार मान लिया। माता पिता के कई सपने थे। कुछ अपने और कुछ अधूरे सपने थे। वैसे भी आजकल के माता पिता बहुत एम्बिशयस होते है, खुद तो फटफटिया में चलते है और मर्सिडीज का बोझ बेटे के पीठ पर रख देते है। ठीक उसी तरह मेरे पापा खुद सपने पूरे नहीं कर पाये, “भगवंत नाम देकर अपने सपनो का बोझ मुझे दे बैठे । इससे पहले कि मैं कुछ बड़ा होकर समझ पाता और उनके सपने के बोझ को अपने कंधे पर उठा पाता। 2 वर्ष की आयु में पापा हमें छोड़कर चल बसे। दो वर्ष की आयु से सपनो को न समझते हुए भी अपने पापा के सपनो के बोझ को अपनी पीठ पर उठाने लगा। आज भी जब मेरी कमर दर्द होती है तो मैं इन्ही सपनो के बोझ को कोसता हूँ।

जब थोड़ा बड़ा हुआ, अपने पैरो पर खड़ा हुआ। अपने नाम का मतलब माँ से पूछा, वह बोली ” छोटे, पापा तो चले गए, इस नाम में तुम्हारे पापा के सपने है।कुछ अपने और कुछ अधूरे सपने है। वैसे मैं तो ज्यादा पढ़ी लिखी हूँ नहीं, तो मुझे अधिक कुछ पता नहीं। ”

आखिर मम्मी ने भी उस बोझ को उतारने में मेरी मदद नहीं की तथा अपने सपनो का बोझ और लाद दिया। सपनो का बोझ लादता हुआ कुछ बड़ा हुआ, तो मुझे लगा कन्हैया जी के कई प्रेमिकाएं थी, मेरी भी एक होनी चाहिए। कैसे भी करके थोड़ी मोटी, थोड़ी छोटी, थोड़ी गोरी, थोड़ी भोली लड़की पट गयी। प्रेम प्रसंग शुरू हुए कुछ दिन ही बीते थे कि रही सही कसर मेरी प्रेमिका ने पूरी कर दी। नाम दे बैठी अनमोल’ बोली तुम बहुत अनमोल हो। उसने नाम क्या दिया मेरे सर पर अपने उम्मीदों का बोझ रख दिया। वह तो छोड़कर चली गयी। पर सर में उसके उम्मीदों के बोझ के कारण आये दिन मेरा सर दर्द करता है, मेरी वजह से ही डिस्प्रिन का कारोबार चलता है।

‘भगवंत अनमोल‘ नाम लेकर सपने पूरे करने तो चल दिए पर पता लगा दोनों नाम, एक दुसरे के विपरीत है। भगवंत नाम कन्हैया जी के नाम पर है तो नाम भी कमाना है और कई प्रेमिकाएं भी बनानी है।

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मेरी ज़िन्दगी इतनी ही हलकी है जितना हल्का यह जीवन परिचय। मेरा मानना है, ज़िन्दगी खुशनुमा होनी चाहिए, गंभीर नहीं । ज़िन्दगी कोई अस्पताल के बेड पर पड़े मरीज की तरह नहीं है, जो सीरियस ही रहा जाए। इसके विपरीत किताबे उतनी ही गंभीर मिलेंगी जितना फोटो खिंचाते समय हमारे बाबा जी का चेहरा, जिनके मुख मंडल से कभी हंसी छूट ही नहीं सकती।

अभी अभी अपनी ज़िन्दगी की सिल्वर जुबली पूरी करते ही गली पर किताबो का पंजा मारकर सबको चौका दिया है।

उपंन्यासो की तिकड़ी- द परफेक्ट लव, एक रिश्ता बेनाम सा, ज़िन्दगी 50-50

मोटिवेशनल पुस्तक की दुकड़ी- कामयाबी के अनमोल रहस्य, तुम्हे जीतना ही होगा

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जब दिल न लगे दिलदार, हमारी गली चले आना –