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Release Date- August, 2017
ISBN- 978-9386534132
Publisher- Rajpal & Sons, New Delhi
Genre- Fiction
Format- Paperback
Language- Hindi
Price-225/-

ज़िन्दगी 50-50

  • लगातार तीन बार से दैनिक जागरण नील्सन बेस्ट सेलर एवं उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत उपन्यास!!!
  • ” इस उपन्यास की कथावस्तु और शैली आपको इसे अंत तक पढ़ने के लिए बांधे रखती है. एक बार पढना शुरू करने के बाद आप इसे बीच में छोड़ना नही चाहते ” – फेमिना पत्रिका
  • ” यह मात्र एक किताब ही नहीं अपितु एक वर्ग विशेष के जीवन का वो सच है जिसे समाज के हर सामान्य व्यक्ति को अवश्य जानना चाहिए ” – समय पत्रिका
  • ” आपने किन्नरों का जो मनोविज्ञान अपनी पुस्तक में उतारा है, वह लाजवाब है। मैं आश्चर्यचकित हूँ कि एक पुरुष कैसे हमारी कठिनाइयों एवं अंतर्द्वंद को इतनी गहराई से उतार सकता है। ” – रवीना बरिहा (किन्नर एवं समाज सेविका)

भावनाएं, जरूरते, महत्वाकांक्षाएं- ये सब एक स्त्री की- लेकिन शरीर पुरुष का! एक बेहद दर्दनाक परिस्थिति जिसमे ज़िन्दगी, ज़िन्दगी नहीं, समझौता बनकर रह जाती है. ऐसे इंसान और उसके घरवालो को हर मकाम पर समाज के दुर्व्यवहार और जिल्लत का सामना करना पड़ता है. अनमोल इस बात को अच्छी तरह समझता है क्योंकि उसकी अपनी एकमात्र संतान और छोटा भाई, दोनों की यही वास्तविकता है, दोनों किन्नर है. भाई को पल-पल पिसते, घर और बाहर प्रताड़ित और अपमानित होते हुए देख अनमोल यह दृढ निश्चय करता है कि वह अपने बेटे को अधूरी ज़िन्दगी नहीं, बल्कि भरपूर ज़िन्दगी जीने के लिए हर तरह से सक्षम बनाएगा!! लेकिन क्या वह ऐसा कर पाता है….पढ़िए इस उपन्यास में.

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